जय बलदेव हरे, स्वामी जय बलदेव हरे. ।
हे दुःख भंजन, रोहिणी नंदन, सब दुख दूर करे ।।
ॐ जय बलदेव हरे

जय बलदेव हरे, स्वामी जय बलदेव हरे.
हे दुःख भंजन, रोहिणी नंदन, सब दुख दूर करे
ॐ जय बलदेव हरे

में जग में भटका हु । पार करो बाबा । स्वामी पार करो बाबा ।
अपनी शरण लगाओ उद्धार करो बाबा ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

माथे मुकुट विराजे, सिरे पंचरंग चीरा । स्वामी सि पचरंग चीरा ।
चन्दा के सम चमकै । ठोड़ी पै हीरा ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

सुन्दर वस्त्र मनोहर, मन हरनी झांकी । स्वामी मन हरनी झांकी ।
आपने भक्त जनन पै, नजर करो बाँकी ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

माखन मिश्री खावे, विजया भोग धरे । स्वामी विजया भोग धरे ।
सकल मनोरथ सारे , विपदा दूर करे ।
ॐ जाये बलदेव हरे ।

मैया संमुख विराजै, सबके दुःख हरनी । स्वामी सबके दुःख हरनी
सबकी करै सहाई, माँ मंगल करनी ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

जो नर तुमको ध्यावै, कष्ट नहीं पावै । स्वामी कष्ट नहीं पावै ।
अमर प्रेम पद पावै, भाव से तर जावै ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

सुन्दर ताल बानो है, क्षीर सागर न्यारो । स्वामी क्षीर सागर न्यारो ।
जो स्नान करै जन, मिट जाये दुःख सारो ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

कृष्णचन्द्र वृन्दावन, महारास कीन्हौ । स्वामी महारास कीन्हौ ।
गिरि के ऊपर बैठे, सिंह रूप लीन्हो ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

अजब अनौखी लीला, है ब्रज में भारी । स्वामी है ब्रज में भारी ।
वानर द्विविद गिराया, हलमूसल धारी ।
ॐ जय बलदेव हरे ।

दाऊ बाबा की आरती, जो जन नित गावै । स्वामी जो जन नित गावै ।
मान वाँछित फल पावै । मन - मन हरषावै ।
ॐ जय बलदेव हरे ।